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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 79, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

अरण्यशून्यमेवासीत्तद्ब्रह्ममननं तदा । कठिनाकाण्डविध्वस्तं पृथिव्यामिव पत्तनम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, ब्रह्माजी के चरम-साक्षात्कार के समय सबके विदेह कैवल्य को प्राप्त हो जाने से उन ब्रह्मादेव का वह सारा ब्रह्माण्ड, जो उनके संकल्प से सिद्ध था, शून्य अरण्य की नाई ऐसे हो गया, जैसे पृथिवी मेँ किसी भयंकर आकस्मिक नाश के हेतु से विध्वस्त हुआ नगर