Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 8, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
मण्डपोऽस्ति महास्तम्भो मुक्तामणिविनिर्मितः ।
बहुयोजनलक्षाणि कान्तकाञ्चनचित्रितः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
यह सारा ससार संकल्पमात्र कल्पित हैं, इस कथन को दद बनाने के लिए संसार में
सकल्फदूतमण्डय के आकार की कल्पना करते हैं /
हे विद्याधर, यह संसार मुक्ता ओर मणियों से विनिर्मित बड़े-बड़े खम्भों से युक्त तथा
सुन्दरसुवर्ण से चित्रित लाखों योजन में बहुत दूर तक विस्तृत संकल्पकल्पित एक महामण्डप
है