Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

व्योमाकृतिः स भगवाम्व्योमवर्णो महाद्युतिः । चिद्व्योममात्रसारत्वादाकाशात्मा स उच्यते ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

वस्तुतः महाप्रकाशस्वरूप वह भगवान्‌ चिदाकाश मात्र सार होने के कारण आकाशमात्र आकारवाला हे, व्योमवर्णं हे ओर वह आकाशात्मा ही कहा जाता है । सम्पूर्ण प्राणियों की जो आत्मा है तद्रूप होने से तथा सर्वव्यापी होने से वह महान्‌ आकारवाला है