Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
एतस्मिन्नन्तरे तत्र दृष्टवानहमम्बरात् ।
यावदभ्युदितं भीमं भीतः किंचिन्नभोन्तरात् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी बीच में वहाँ मैने कोई एक भयंकर रूप देखा, जो आकाश से यानी ठीक आकाश के मध्य से
अभ्युदित हुआ था । मैं वह रूप देखते ही मारे भयके काँप गया