Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 83, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
निर्विकल्पसमाधिर्हि सिद्धान्तः सर्ववाड्मये ।
तच्च जीवदृषन्मौनं तूष्णीमेवात आस्यताम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
इस सम्पूर्ण वाङ्मय प्रपंच मेँ निर्विकल्प समाधि ही सिद्धान्त है ओर वह जीव
की पाषाण के समान मौनावस्था है । इसलिए आप बिलकुल चुपचाप स्थित रहिये