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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 83, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

स्वप्ननिर्माणपुरवत्संकल्परणवेगवत् । कथार्थसार्थरसवन्मनोराज्यविलासवत् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

स्वप्न में जिसका निर्माण हुआ है उस नगर की तरह, मनोरथ के युद्ध के वेग के समान, सुन लेना या कह देना ही एकमात्र जिसका प्रयोजन है ऐसे कथाओं के रस की तरह, मनोराज्य के विलासकी तरह यह सब भ्रम है, चिद्घन मेँ भासित हो रहा है