Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
क्वचित्किंचिज्जरामृत्यून्मुक्तभूतलमानवम् ।
क्वचित्किंचिदसंजातचन्द्रशून्यशिरःशिवम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, कहीं पर तो क्षीरसागर का मंथन
ही नहीं हुआ था, इसलिए वह मृत्युग्रस्त देवताओं से पूर्ण था तथा वहाँ अमृत, उच्चै:श्रवा, ऐरावत,
धन्वन्तरि, कामधेनु, लक्ष्मी और विष भी उत्पन्न नहीं हुए थे