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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

ततो मुहूर्तमात्रेण स रुद्रस्तौ नभोन्तरे । खण्डौ विलोकयामास दृशार्केणेव रोदसी ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर एक मुहूर्तमात्र मे अन्य आकाश में उस रुद्रने उक्त खण्ड (ब्रह्माण्ड के ऊपर-नीचे के दो हिस्से) उस तरह, सूर्यत्मिक दृष्टि से देखे, जिस तरह दयु ओर भूमि