Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अतिष्ठदेक एवासावेकं खे खमिवाखिले ।
भुक्तब्रह्माण्डखण्डोग्रमण्डमण्डकमण्डलः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय वह रुद्र भगवान्,
जिसने कि ब्रह्माण्ड खण्डरूपी उग्र दुग्धसार और पकवान के मण्डल को ग्रस लिया था, ऐसे एकरूप
हो गये, जैसे आकाश में आकाश एकरूप हो