Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 68
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 87, verse 68 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
विपुलाग्रस्थलोरस्कं पद्माकरकृतेक्षणम् ।
सितासितघनोष्णीषं दशाशोदरमन्दिरम् ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
विशाल, सम भूप्रदेशरूपी वक्षःस्थल से अलंकृत, पद्माकाररूपी नेत्रो से भूषित, सफेद और काले
मेघरूपी (4) पगड़ी से सुशोभित तथा दसो दिशाओं का उदर ही मेरा मन्दिर (घर) था