Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 88, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 88, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 88 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
निमीलितैक्षणानन्दतनूनामसमाक्रमम् ।
क्वचित्सूक्ष्मतरोल्लेखमङ्कुरोल्लासनं नवम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर यह दृश्य देखा कि नेत्रो को मृदि हुए प्रसन्नशरीर समाधिनिष्ठ महात्माओं
को अपूर्व रोमांकुरों का चमत्कारी उल्लास हो रहा है । वह रोमांकुरोल्लास सूचित करता था कि उनको
सूक्ष्मतत्त्त का अनुभव हो गया है