Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 88, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 88, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 88 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
तनुतरपवनविकम्पितकोमलनलिनीदलास्तरणैः ।
विहरणमिव मे विहितं सरोभिरङ्गेषु निर्वाणम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, मेरे भूतलरूप अंगों में कहीं पर सरोवरों ने मन्द-मन्द पवनसे
हिलाये गये कोमल कमलिनियों के दलों के आस्तरणों द्वारा अपूर्वं आनन्दरूप क्रीडाका, मानों मेरे
लिए, निमार्ण कर दिया