Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 89, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
त्रैलोक्यभूतजालानां कालत्रितयभाविनाम् ।
संभ्रमः स्वप्नसंकल्पो मनोराज्यदशास्थितौ ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, भूत, भविष्यत् ओर वर्तमान
कालमें होने वाले त्रैलोक्य का समस्त भूतजाल केवल भ्रान्तिरूप ही है, वह संकल्प-जैसा है,
उसकी तुलना ठीक मनोराज्य से की जा सकती है