Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 89, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

इदं स्थिरं सुकठिनं विततं भूमिमण्डलम् । अस्तीति जायते बुद्धिर्व्योम्नीव चिरवेदनात् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, यह भूमण्डल स्थिर, अत्यन्त कठोर, अतिविस्तारवाला है, इस प्रकार की बुद्धि, आकाश में नीलताबुद्धि के सदृश, चिरकाल के अभ्यास से ही उत्पन्न होती है