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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 9, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 9, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

तेनैव भूयते भूरि यच्चित्तं कचितं स्वतः । अचेतनं चेतनं वा यथेच्छसि तथा कुरु ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

अचेतन या चेतन (मिथ्या जगद्रूप या परमार्थ सद्ब्रह्मरूप) जो ही अपने-आप चिति में चित्रित होता है वही सब चेतनरूप हो जाता है। ये दोनों तुम्हारे अधीन हैं, अब इनमें जो तुम चाहो, सो करो-तुम्हारी इच्छा हो, तो समाधि लगाओ या न हो, तो उससे विरक्त हो जाओ