Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
अथ ते मरुवद्भास्वांस्तत्राहमनुभूतवान् ।
जगदाकाशकोशेषु तेषु तामरसेक्षण ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे कमलदललोचन, तदनन्तर
अपनी धारणा से कल्पित उन जगदाकाश के कोशों में मै सूर्य होकर नीचे कही जानेवाली समस्त
वस्तुओं का अपने अन्दर ऐसे अनुभव करने लगा, जैसे कि प्रसिद्ध मरुस्थली अपने अन्दर नदी
आदि की कल्पना का अनुभव करती है