Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
अब्धाऽब्धौ शफरावर्तमब्धा गोमञ्जरीगणः ।
अब्दादौ दावदहनं वैद्युतं द्योतनं तनौ ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीराघव, समुद्र का जल पी जानेवाला बडवानल भी मैं बन
गया । मैंने अपने बडवानल रूप से समुद्र में डरे हुए छोटे-छोटे मत्स्यों के परिभ्रमण का खूब कौतुक
देखा । जल को स्वाहा करनेवाला सूर्य किरण का समूह बनकर मैंने अपने शरीर में प्रकाश का
अनुभव किया। मेघ, पर्वत आदि में मैंने बिजली और दावाग्नि का स्वरूप धारण कर लिया और उन
शरीरों में अपने में अपूर्व प्रकाश का अनुभव किया