Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
शुक्लकृष्णारुणादीनां नित्यं ज्योत्स्नाङ्गशायिनाम् ।
पुत्राणामिव वर्णानां सर्वेषां देहदः पिता ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
संसार में जितने भी रूप हैं, वे सब प्रकाश के (तेज
के) ही अंश हैं, अतः सदा आलोक की (तेज की) गोद में शयन करनेवाले शुक्ल (श्वेत), कृष्ण,
अरुण आदि समस्त वर्णो का, पुत्रों को देह देनेवाले पिता के सदृश, वह तेज स्वरूपदाता पिता
है