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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

दृष्टं पातालकेष्वीषत्तमोरूपेषु पावकम् । अर्धदृष्टं रजोरूपे भूतले भूतमालिते ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

तमोभाय, रजोभाग एवं सत्वभाग की बहुलता से युक्त पाताल आदि लोको में तेज के प्रकाश का तारतम्य बतलाते हैं । तमोगुण की अधिकता से युक्त पातालकुहरों में यह तेज स्वल्प प्रकाश करता है और अनेकविध भूतों की माला (परम्परा) से युक्त, रजोगुण की विपुलतावाले भूतल में यह आधा प्रकाश करता है