Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
सस्वर्गभूमिपातालततलोकान्तरान्तराः ।
सभावाभाववैधुर्यजरामरणसंभ्रमाः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ स्वर्ग, भूमि, पातालतल तथा
अन्यान्य लोकान्तर थे, भाव, अभाव, वैधुर्य, जरा, मरण, आदि की भ्रान्तियाँ भी वहाँ विद्यमान
थीं