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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

तृणगुल्मलतावल्लीदलताण्डवपण्डितः । लतौषधिफलोल्लासकुसुमामोदमण्डितः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

तृण, गुल्म, लता, वल्ली तथा पत्तों को ताण्डव नृत्य सिखलाने मेँ महापण्डित भी मैं बन गया एवं लता ओर औषधियों के फलों के उल्लासो तथा कुसुमं की सुगन्धो आमोदों से विभूषित हो गया