Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
मामथोवाच वचनं चारु चन्द्रांशुशीतलम् ।
आह्लादनमनिन्द्यं च निरवद्यं सुखोदयम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद वह मुझसे यह
वचन बोले । उनका वचन सुन्दर, चन्द्र-किरणों के सदृश शीतल था, आह्ादकारक था तथा
अनिन्द्य, निर्दोष एवं सुखोत्पादक था