Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 96
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 96 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 96
संस्कृत श्लोक
अद्यैतत्संपरिज्ञातं यदेषा भवतः कुटी ।
आगन्ता त्वं पुनश्चेति मया तन्न विचारितम् ॥ ९६ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, आपकी यह कुटी है और भविष्य में यहाँ पर आप पधारेगे, यह उस समय मैंने नहीं
विचारा । आज ही मुझे यह ज्ञात हुआ है