Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 98
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 98 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 98
संस्कृत श्लोक
एतन्मे भगवन्वृत्तमेषोऽस्मीति यथास्थितम् ।
मया ते कथितं सर्वं यथा जानासि तत्कुरु ॥ ९८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे भगवन्, “तुम
कहाँ स्थित हो" इत्यादि जितने आपने मुझसे प्रश्न किये थे और मेरी जो खरी हकीकत रही,
वह सब मैंने कही । अब इसके बाद मुझ अपराधी के ऊपर दण्ड या अनुग्रह इन दोनों में से
जो कुछ भी आपकी समझ में आता हो, वह कीजिए