Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
पिशाचाः केचिदाकाशसदृशाः सूक्ष्मदेहकाः ।
हस्तपादादिसंयुक्ताः पश्यन्ति त्वमिवाकृतिम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, कोई पिशाच आकाश के सदुश सूक्ष्म
शरीरवाले-मनोमय देहवाले स्वप्न के समान कल्पित हाथ, पैर आदि से युक्त होते हैं और आप ही
के समान आकार को देखते हैं