Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
स यत्पश्यति तत्तादृक् शून्यात्मा शून्यमम्बरे ।
ब्रह्म ब्रह्मणि वा ब्रह्मा तदिदं जगदुच्यते ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
निराकार मनरूप वह ब्रह्मा ब्रह्मस्वरूप
चिदाकाश में एकमात्र जिस शून्यस्वरूप ब्रह्माण्डाकार का अवलोकन करता है वही जगत् कहलाता
है