Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 75
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 75 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 75
संस्कृत श्लोक
ताश्चिराभ्यासवशतस्त्वाधिभौतिकसंविदम् ।
प्राप्ता दीर्घानुभवनात्स्वप्नजाग्रद्दशामिव ॥ ७५ ॥
हिन्दी अर्थ
तब हम लोगो की देह मे भोकिकता का अनुभव केसे होता है ? इस शंका पर कहते हैं /
चिरकाल के अभ्यास के वश वे सबके सब आधिभौतिक संवित् को ऐसे प्राप्त हो गये हैं
जैसे दीर्घकाल के अनुभव से यानी दीर्घकाल की भावना से स्वप्न जाग्रत् दशा को प्राप्त होता
है