Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
एष सोहमिहाकाशवसिष्ठः पुष्टतामिव ।
गतोऽद्य स्वात्मनाभ्यासाद्भवतां वा भवत्स्थितिः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
यह जो मैं
आकाशवसिष्ठ हूँ, सो आज यहाँ अपने मन के अभ्यास से ही परिपुष्टता को मानों प्राप्त हुआ हूँ ।
अथवा आपके मन के अभ्यास से आपकी बुद्धि के अनुसार यह मेरी भौतिकदेहस्थिति है