Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अहमादिरयं सर्गस्त्वपरिज्ञानदोषतः ।
वेताल इव बालानां गतो वो वज्रसारताम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जगत् आदि सारी सृष्टि अपरिज्ञान के दोष से आप अज्ञजनों की दृष्टि में वज
के तुल्य ऐसे ही दृढ़ता को प्राप्त हो गई है जैसे कि बालकों की दृष्टि में वेताल