Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
नास्तमेति न चोदेति न कदाचन किंचन ।
सर्वमेव च चिन्मात्रमाकाशविशदं यतः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
किसी समय कोई कुछ भी न तो नष्ट
होता है और न पैदा ही होता है, क्योंकि जो भी कुछ है, वह सभी आकाशवत् अतिविशद
चैतन्यमात्र रूप आत्मा ही है