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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

चितिरेकास्ति नो सर्गो हेमास्ति न तदूर्मिका । स्वप्नाचले चिदेवास्ति न तु काचन शैलता ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

जो भी कुछ है, वह केवल चिति ही है, सृष्टि नहीं । सुवर्णं के विकार कटकादि स्थल में वास्तव में सुवर्ण ही है, कटकादि नहीं वैसे ही यहाँ समझना चाहिए । भद्र, स्वप्न -पर्वतस्थल में क्या है ? चिति ही तो स्वप्नपर्वत है, उसको छोडकर दूसरा कोई पर्वत का रूप वहाँ नहीं रहता