Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
शरीरनाश एवैषां सुखं संप्रति दुःखकृत् ।
अस्माकमिव तेषां तज्जीवितं तु सुखायते ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
शरीरकाल मेँ सुखपूर्वक स्थित ये
जो कृमि, कीट आदि हैं, उनको भी हम लोगों के सदृश शरीरविनाश ही दुःख पैदा करनेवाला है
और जीवन (शरीर में प्राणस्थिति) सुख पैदा करनेवाला है