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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

निद्रामयानां वृक्षाणां स्वसत्तामचलादयः । स्थिता अनुभवन्तोऽन्ये चिदाकाशमखण्डितम् ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

तो पर्वत आदि कैसे अनुभव करते हैं 2 इस आशंकापर कहते हैं । गाढ निद्रावाले (सुषुप्ति में स्थित) वृक्षादि की अत्यन्त मूढभाव से जो अपने में स्थिति है उसका पाषाण आदि अचल पदार्थ अनुभव करते हैं और जो हिमालय, सुमेरु आदि तत्त्वज्ञानी पर्वत है, वे तो अखण्ड चिदाकाश का अनुभव करते हुए सदा समाधि में स्थित हैं