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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 1, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

अप्सरा उवाच । वृत्तान्तः कोऽभवत्तत्र कथयस्व मम प्रभो । प्रष्टुकामा विनीतास्मि नोद्वेगं कर्तुमर्हसि ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

अप्सरा ने कहा : भगवन्‌, वहाँ पर कौन घटना हुई, उसे मुझसे किये मैं आपसे विनयपूर्वक पूछती हू । मेरी अवहेलना न कीजिये