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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 1, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 52

संस्कृत श्लोक

वाल्मीकिरुवाच । श्रृणु राजन्प्रवक्ष्यामि रामायणमखण्डितम् । श्रुत्वावधार्य यत्नेन जीवन्मुक्तो भविष्यसि ॥ ५२ ॥

हिन्दी अर्थ

वाल्मीकिजी ने कहा : राजन्‌, सुनिए, मै अखण्डतत्व प्रतिपादक रामायण की कथा कहूँगा, यत्नपूर्वक उसे सुनकर एवं हृदय में धारण कर आप जीवन्मुक्त हो जायेंगे