Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 1, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
वसिष्ठरामसंवादं मोक्षोपायकथां शुभाम ।
ज्ञातस्वभावो राजेन्द्र वदामि श्रूयतां बुध ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त रामायण वसिष्ठ-राम संवादस्वरूप हे ।
(५) वह मुक्ति का अद्वितीय उपाय और अत्यन्त कल्याणकारी हे । हे राजेन्द्र, आप उसे समझने में
समर्थ हैं ओर मैं भी उसे जानता हूँ, इसलिए मैं आपको उसे सुनाता हू । आप सावधान होकर सुनें