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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, Verse 54

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 1, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

राजोवाच । को रामः कीदृशः कस्य बद्धो वा मुक्त एव वा । एतन्मे निश्चितं ब्रूहि ज्ञानं तत्त्वविदां वर ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

राजा ने कहा : हे तत्त्वज्ञानियों में श्रेष्ठ, राम कौन हैं ? उनका कैसा स्वरूप है ? वे किस वंश में उत्पन्न हुए थे ? वे बद्ध थे अथवा मुक्त ? पहले आप मुझसे यही निश्चयकर कहने की कृपा करें