Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 1, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
केवलात्कर्मणो ज्ञानान्नहि मोक्षोऽभिजायते ।
किंतूभाभ्यां भवेन्मोक्षः साधनं तूभयं विदुः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त अर्थ को दृढ़ करने के लिए फिर कहते हैं।
केवल कर्मो से या केवल ज्ञान से मोक्ष नहीं होता, किन्तु ज्ञान और कर्म दोनों से मोक्ष होता है, अतः
ब्रह्मज्ञ बड़े बड़े मुनि कर्म और ज्ञान दोनों को मोक्ष के साधन मानते हैं । इसलिए अनुभव सिद्ध विषय में
किसी प्रकार का सन्देह नहीं करना चाहिए