Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 1, Verses 9–10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 1, verses 9–10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 9-10
संस्कृत श्लोक
अस्मिन्नर्थे पुरावृत्तमितिहासं वदामि ते ।
कारुण्याख्यः पुरा कश्चिद्ब्राह्मणोऽधीतवेदकः ॥ ९ ॥
अग्निवेश्यस्य पुत्रोऽभूद्वेदवेदाङ्गपारगः ।
गुरोरधीतविद्यः सन्नाजगाम गृहं प्रति ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
इस विषय में एक प्राचीन इतिहास कहता हूँ : प्राचीन
काल में सम्पूर्ण वेदों का ज्ञाता कारुण्य नाम का एक ब्राह्मण था, उसके पिता का नाम अग्निवेश्य था।
गुरुजी से वेद और सभी वेदांग, शास्त्र आदि का पूर्णरूप से अध्ययन कर वह कारुण्य अपने घर
आया