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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

वसिष्ठविश्वामित्राद्यास्तथा दशरथादयः । ददृशू राघवं दूरादुपायान्तं गुहोपमम् ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

इधर वसिष्ठ, विश्वामित्र आदि ऋषिवृन्द तथा महाराज दशरथ आदि राजवृन्द ने दूर से अपने निकट आ रहे साक्षात्‌ कार्तिकेयके तुल्य रूपवान्‌ ओर बलवान्‌ श्रीरामचन्द्रजी को देखा