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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

एवं मुनीन्द्रे ब्रुवति पितुः पादाभिवन्दनम् । कर्तुमभ्याजगामाथ रामः कमललोचनः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

जबकि विश्वामित्रजी "रामचन्द्रजी को लाओ" यों रामचन्द्रजी के विषय में राजा से कह रहे थे, उसी समय कमलनयन श्रीरामचन्द्रजी श्रीपिताजी के चरणों में प्रणाम करने के लिए समीप में आये