Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
प्रथमं पितरं पश्चान्मुनी मान्यैकमानितौ ।
ततो विप्रांस्ततो बन्धूंस्ततो गुरुगणान्सुहृत् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने पहले-पहले पिताजी को प्रणाम किया । तदुपरान्त माननीय
पुरुषों द्वारा भी प्रधानरूप से सम्मानित वसिष्ठ ओर विश्वामित्रजी को प्रणाम किया