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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

जग्राह च ततो दृष्ट्या मनाङ्मूर्ध्ना तथा गिरा । राजलोकेन विहितां तां प्रणामपरम्पराम् ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर ब्राह्मणों को, बन्धुओं को और अपने बड़े-बूढ़ों को प्रणाम किया | तदनन्तर राजाओं द्वारा किये गये प्रणामों को तनिक झुकाये गये मस्तक से, प्रसन्न दृष्टि से और मधुर वाणी से ग्रहण किया