Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
विहिताशीर्मुनिभ्यां तु रामः सुसममानसः ।
आससाद पितुः पुण्यं समीपं सुरसुन्दरः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
समचित्त ओर देवतुल्य दर्शनीय श्रीरामचन्द्रजी मुनियों का आशीर्वाद ग्रहणकर पिताजी की पवित्र सन्निधि
में पहुँचे