Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
पादाभिवन्दनपरं तमथासौ महीपतिः ।
शिरस्यभ्यालिलिङ्गाशु चुचुम्ब च पुनःपुनः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
स्नेहमय राजा ने प्रणामशील रामचन्द्रजी का सिर सूँघकर आलिंगन किया और जैसे
राजहंस कमल को चूमता है वैसे ही बार बार उनका मुँह चूमा