Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
विश्वामित्र उवाच चलन्नीलोत्पलव्यूहसमलोचनलोलताम् ।
ब्रूहि चेतःकृतां त्यक्त्वा हेतुना केन मुह्यसि ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीविश्वामित्रजी ने कहा : राजकुमार, चित्त द्वारा की गई चंचल नीलकमलों के तुल्य
नेत्रोंकी चंचलताको छोडकर कहिये कि आपके मोहका क्या कारण है ?