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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 33

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

किमतज्ज्ञ इवाज्ञानां योग्ये व्यामोहसागरे । विनिमज्जसि कल्लोलबहुले जाड्यशालिनि ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

ऐसे प्रभावशाली होने पर भी मूढ लोगों के योग्य विक्षेपरूप बड़ी तरंगों से महान्‌ आवरणरूप शैत्य से युक्त मोहरूप समुद्र में अनात्मज्ञ (आत्मतत्व को न जाननेवाले) की भाँति क्यों निमग्न होते हो ?