Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
राजपुत्र महाबाहो शूरस्त्वं विजितास्त्वया ।
दुरुच्छेदा दुरारम्भा अप्यमी विषयारयः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
पुत्र, तभी तक आपत्तियाँ
निर्बल होकर दूर रहती हैं, जब तक मोह को अवकाश नहीं दिया जाता। मोह को अवकाश मिलने पर तो
वे बड़ी बलवती हो जाती हैं ॥३ १॥ श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे राजपुत्र, हे महाभूज, तुम बड़े शूरवीर हो,
तुमने दुःख की परम्परा के जनक और कठिनाई से नष्ट होनेवाले इन विषयरूप शत्रुओं पर विजय पा ली
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