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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

निजां च प्रकृतामेव व्यवहारपरम्पराम् । परिपूर्णमना मान्य आचरिष्यत्यखण्डितम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

माननीय श्रीरामचन्द्रजी तदनन्तर स्वस्थचित्त होकर अपने वर्ण ओर आश्रम के अनुरूप सम्पूर्ण व्यवहारो को निर्बाधरूप से करेंगे