Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 12, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 12, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
किमेतेषु प्रपञ्चेषु भोगा नाम सुदुर्भगाः ।
मुधैव हि वयं मोहात्संस्थिता बद्धभावनाः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस संसाररूप प्रपंच में ये जो अभागे भोग हैं, वे
कौन चीज हैं कि हम लोग उनके व्यर्थ मोह से या भ्रान्ति से बद्ध होकर अवस्थित हैं 2